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Hindi Patient Guide · Dhantoli, Nagpur

फीटल इको कब करवाना चाहिए?

फीटल इको हर प्रेग्नेंसी में ज़रूरी नहीं होता। पर जहाँ कोई पक्का risk factor है, वहाँ «पिछला स्कैन नॉर्मल था» इसे टालने की वजह नहीं बनता। यह पेज बताता है कि किसे इसकी ज़रूरत है और किसे नहीं।

हर प्रेग्नेंसी में ज़रूरी नहींRisk factor हो तो टालना नहींस्कैन Dr. Kunda खुद करती हैंFMF (London) certified
18–24हफ्ते — आम समय
30–45मिनट
14+साल फीटल मेडिसिन में
DhantoliNagpur – 440012

फीटल इको बच्चे के दिल की अलग और विस्तृत जाँच है। एनोमली स्कैन में भी दिल देखा जाता है, पर वह एक screening नज़र होती है — चार कक्ष, बड़ी नसों का निकलना, और धड़कन। फीटल इको उससे आगे जाता है: हर कक्ष, हर valve, नसों के जुड़ाव, लय, और खून का बहाव किस दिशा में और किस रफ़्तार से है। दोनों का मक़सद अलग है, और इसीलिए एक दूसरे की जगह नहीं ले सकता।

कृपया ध्यान दें इस केंद्र पर होने वाली हर सोनोग्राफी सिर्फ medical diagnosis के लिए की जाती है, PCPNDT Act, 1994 के पूर्ण पालन के साथ।

किसे ज़रूरत होती है

यह जाँच हर गर्भवती महिला के लिए नहीं है। इसकी सलाह तब दी जाती है जब कोई ऐसा कारण मौजूद हो जिससे दिल की बनावटी दिक्कत की संभावना आम से ज़्यादा हो।

कारणक्यों मायने रखता है
परिवार में दिल की जन्मजात बीमारीमाता-पिता या पहले बच्चे में ऐसी दिक्कत रही हो तो संभावना बढ़ जाती है
माँ को शुगर, ख़ास तौर पर प्रेग्नेंसी से पहले सेशुरुआती हफ्तों में शुगर का नियंत्रण दिल की बनावट पर असर डालता है
माँ को कोई autoimmune बीमारीकुछ antibodies बच्चे के दिल की लय पर असर डाल सकती हैं
पिछले स्कैन में दिल को लेकर कोई शकयही आम कारण है — एनोमली स्कैन में कोई view साफ़ न मिलना या असामान्य लगना
बढ़ी हुई NTपहली तिमाही की बढ़ी हुई परत का दिल की दिक्कतों से जाना-पहचाना जुड़ाव है
IVF से हुई प्रेग्नेंसीआँकड़ों में थोड़ी बढ़ी हुई संभावना देखी गई है
एक जैसे जुड़वाँ बच्चेएक placenta साझा करने वाले जुड़वाँ में दिल पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है
कुछ दवाइयाँ, ख़ास तौर पर शुरुआती हफ्तों में ली गईजो दवा ली गई है उसका नाम बताना ज़रूरी है, ताकि सही आकलन हो
बच्चे की धड़कन बहुत तेज़, बहुत धीमी या अनियमितलय की जाँच फीटल इको का ही हिस्सा है

अगर इनमें से कुछ भी नहीं है, तो आमतौर पर एनोमली स्कैन की cardiac जाँच पर्याप्त मानी जाती है।

«पिछला स्कैन नॉर्मल था» — यह वजह काफ़ी नहीं है

यह वह जगह है जहाँ अक्सर गड़बड़ होती है, इसलिए इसे साफ़ लिखना ज़रूरी है।

एनोमली स्कैन में दिल की जो जाँच होती है वह screening है। उसका काम ज़्यादातर बड़ी दिक्कतों को पकड़ना है, हर दिक्कत को नहीं। दिल की कई बनावटी समस्याएँ ऐसी होती हैं जो चार-कक्ष वाले view में सामान्य दिखती हैं और तभी पकड़ में आती हैं जब बड़ी नसों के जुड़ाव और बहाव को अलग से देखा जाए।

इसलिए जब कोई पक्का risk factor मौजूद हो — परिवार में बीमारी, शुगर, बढ़ी हुई NT — तो «पिछला स्कैन तो ठीक था» सुनकर फीटल इको टाल देना एक ऐसी ग़लती है जिसकी क़ीमत जन्म के बाद चुकानी पड़ सकती है। Risk factor होने पर जाँच risk factor की वजह से होती है, पिछली रिपोर्ट की वजह से नहीं।

कब करवाया जाता है

आम तौर पर 18 से 24 हफ्ते के बीच। इस समय दिल इतना बड़ा हो चुका होता है कि उसकी बनावट देखी जा सके, और पर्याप्त समय भी बचा रहता है।

जहाँ बहुत तगड़ा कारण हो — जैसे पहले बच्चे में दिल की गंभीर बीमारी — वहाँ 13 से 16 हफ्ते में एक शुरुआती जाँच की जा सकती है, पर उसे बाद में दोहराना पड़ता है, क्योंकि उस उम्र में हर चीज़ नहीं दिखती।

दोबारा जाँच तब की जाती है जब पहली बार कोई हिस्सा साफ़ न दिखा हो, कोई शक बना रहे, लय में गड़बड़ी मिली हो, या जुड़वाँ बच्चों में निगरानी चल रही हो।

जाँच में क्या देखा जाता है

बनावट

चारों कक्ष, उनके बीच की दीवारें, और valves — सब अपनी जगह और अपने आकार में हैं या नहीं।

जुड़ाव

दोनों बड़ी नसें सही कक्ष से निकल रही हैं या नहीं, और आगे जाकर सही जगह जुड़ रही हैं या नहीं। कई गंभीर दिक्कतें यहीं पकड़ी जाती हैं।

लय

धड़कन की रफ़्तार और नियमितता। बहुत तेज़, बहुत धीमी या अनियमित धड़कन की अपनी अलग जाँच और अपना अलग इलाज है।

बहाव

रंगीन Doppler से यह देखा जाता है कि खून किस दिशा में और किस रफ़्तार से बह रहा है, और कहीं उल्टा तो नहीं जा रहा।

अगर कुछ मिल जाए

दिल की बनावटी दिक्कतें एक जैसी नहीं होतीं। कुछ इतनी छोटी होती हैं कि जन्म के बाद अपने आप बंद हो जाती हैं और कभी किसी इलाज की ज़रूरत नहीं पड़ती। कुछ को जन्म के बाद ऑपरेशन की ज़रूरत होती है, और आज उनके नतीजे पहले से कहीं बेहतर हैं। इसलिए पहला काम यह तय करना होता है कि दिक्कत किस तरह की है, अकेली है या किसी और चीज़ के साथ।

उसके बाद तीन चीज़ें होती हैं: बच्चों के हृदय रोग विशेषज्ञ से बात, ताकि जन्म के बाद का इलाज पहले से तय हो; ज़रूरत हो तो genetic जाँच, क्योंकि दिल की कुछ दिक्कतें दूसरी स्थितियों के साथ आती हैं; और डिलीवरी की योजना — ऐसे बच्चे का जन्म वहाँ होना चाहिए जहाँ ज़रूरी विशेषज्ञ और NICU पहले से मौजूद हों।

जन्म से पहले पता चल जाने का असली फ़ायदा यही है। बीमारी बदलती नहीं, पर तैयारी बदल जाती है, और तैयारी नतीजे पर असर डालती है।

जाँच, समझाना और आगे की निगरानी — एक ही जगह

फीटल इको Dr. Kunda खुद करती हैं और उसका मतलब भी वही समझाती हैं। जहाँ आगे की निगरानी या दूसरी जाँचें ज़रूरी हों, वे उसी प्रेग्नेंसी की care का हिस्सा बन जाती हैं।

Complete Pregnancy Care · हिंदी में सारी guides · Fetal echo (English)

फ़ीस

फीटल इको और बाक़ी सभी स्कैन की मौजूदा फ़ीस एक ही पेज पर दी गई है।

Pregnancy scan cost देखें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

फीटल इको किस हफ्ते में करवाना चाहिए?

आमतौर पर 18 से 24 हफ्ते के बीच। बहुत तगड़ा कारण होने पर 13 से 16 हफ्ते में एक शुरुआती जाँच की जा सकती है, पर उसे बाद में दोहराना पड़ता है।

क्या यह एनोमली स्कैन से अलग है?

हाँ। एनोमली स्कैन में दिल की एक screening जाँच होती है — चार कक्ष, बड़ी नसों का निकलना, धड़कन। फीटल इको सिर्फ दिल पर केंद्रित विस्तृत जाँच है, जिसमें valves, जुड़ाव, लय और बहाव अलग-अलग देखे जाते हैं।

मेरे परिवार में दिल की बीमारी है, क्या मुझे यह करवाना चाहिए?

अगर माता-पिता या पिछले बच्चे में जन्मजात दिल की बीमारी रही है, तो हाँ, इसकी सलाह दी जाती है। रिश्तेदारों में बड़ी उम्र में हुई दिल की बीमारी — जैसे हार्ट अटैक या BP — इस श्रेणी में नहीं आती। कौन सी बीमारी थी, यह बताना ज़रूरी है।

पिछला स्कैन नॉर्मल आया था, फिर भी ज़रूरत है?

अगर कोई पक्का risk factor मौजूद है, तो हाँ। एनोमली स्कैन की cardiac जाँच screening है और दिल की कई दिक्कतें उसमें सामान्य दिख सकती हैं। जाँच risk factor की वजह से की जाती है, पिछली रिपोर्ट की वजह से नहीं।

कितना समय लगता है?

आमतौर पर 30 से 45 मिनट। बच्चे की position ठीक न हो तो इंतज़ार करना पड़ सकता है, क्योंकि दिल को कुछ ख़ास कोणों से ही ठीक देखा जा सकता है।

क्या यह बच्चे के लिए सुरक्षित है?

हाँ। यह पेट के ऊपर से की जाने वाली सोनोग्राफी है, जैसी बाक़ी स्कैन होती हैं। इसमें कोई सुई, कोई दवा और कोई विकिरण नहीं होता।

अगर दिल में कुछ मिल जाए तो क्या होगा?

पहले यह तय होता है कि दिक्कत किस तरह की है। कुछ छोटी दिक्कतें जन्म के बाद अपने आप ठीक हो जाती हैं। जहाँ इलाज चाहिए, वहाँ बच्चों के हृदय रोग विशेषज्ञ से पहले ही बात की जाती है और डिलीवरी ऐसी जगह तय की जाती है जहाँ ज़रूरी सुविधा मौजूद हो।

क्या फीटल इको से दिल की हर दिक्कत पकड़ी जा सकती है?

नहीं। यह जाँच बहुत विस्तृत है, पर कुछ दिक्कतें बहुत छोटी होती हैं और कुछ जन्म के बाद ही सामने आती हैं, क्योंकि जन्म के समय बच्चे के खून के बहाव का रास्ता बदल जाता है। इसीलिए ज़रूरत होने पर जन्म के बाद भी जाँच की सलाह दी जाती है।

क्या इसकी अलग फ़ीस होती है?

हाँ, यह एक अलग जाँच है और इसकी फ़ीस अलग है। मौजूदा दरें scan cost पेज पर दी गई हैं।

In Dr. Kunda’s words
फीटल इको (Fetal Echo) हर गर्भवती महिला के लिए ज़रूरी नहीं होता। मैं पहले देखती हूँ कि कोई रिस्क है या नहीं—जैसे परिवार में हार्ट की बीमारी, शुगर, या पिछले स्कैन में कोई डाउट। लेकिन अगर कोई पक्का रिस्क फैक्टर है, तो सिर्फ 'पिछला स्कैन नॉर्मल था' बोलकर इसे टालना बहुत बड़ी गलती हो सकती है। सही टाइम पर सही डिसीजन लेना ही सबसे ज़रूरी है।
Dr. Kunda Shahane MBBS, MS (Obs & Gynae), FIFM, FMF (London)

Written and medically reviewed by Dr. Kunda Shahane, MBBS, MS (Obs & Gynae), FIFM, FMF (London) · Last reviewed: 13 September 2026

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PCPNDT Act Compliance Notice Mayflower Fetal Medicine & High-Risk Pregnancy Centre strictly complies with the Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques (Prohibition of Sex Selection) Act, 1994. Sex determination and sex-selective practices are prohibited and punishable by law. Our ultrasound services are used exclusively for medical diagnosis. Disclosure of fetal sex is illegal and is not performed at this centre under any circumstances.
Medical Disclaimer यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है और इससे व्यक्तिगत मेडिकल सलाह की जगह नहीं ली जा सकती। फीटल इको की ज़रूरत है या नहीं, यह आपकी अपनी हिस्ट्री और पिछली रिपोर्ट्स देखकर तय होता है। अपनी स्थिति के लिए Dr. Kunda Shahane या अपने treating obstetrician से सलाह लें।