
स्कैन रिपोर्ट का मतलब समझना और अपनी असली स्थिति समझना — ये दो अलग बातें हैं। इस हब पर हर ज़रूरी स्कैन और screening को आसान हिंदी में समझाया गया है, बिना डराए और बिना कुछ छिपाए।
प्रेग्नेंसी में घबराहट अक्सर बीमारी से नहीं, बल्कि रिपोर्ट की भाषा से होती है। «Increased NT», «echogenic focus», «notching», «AC below 10th centile» — ये शब्द रिपोर्ट पर लिखे होते हैं, पर इनका मतलब कोई समझाता नहीं। यह हब उसी खाली जगह को भरने के लिए है। यहाँ हर guide एक ही स्कैन या एक ही स्थिति पर है, आसान हिंदी में, और हर guide यह भी बताता है कि उस टेस्ट से क्या पता नहीं चल सकता।
| प्रेग्नेंसी हफ्ता | स्कैन | क्या देखा जाता है |
|---|---|---|
| 6–9 हफ्ते | Early / dating स्कैन | दिल की धड़कन, संख्या, और सही dating — जिस पर आगे की हर तारीख़ टिकी होती है |
| 11–14 हफ्ते | NT स्कैन | Nuchal translucency, nasal bone, early anatomy, और chromosomal स्थितियों का risk assessment |
| 18–22 हफ्ते | एनोमली (TIFFA) स्कैन | दिमाग, रीढ़, दिल, किडनी, पेट, हाथ-पैर, placenta और पानी की विस्तृत जाँच |
| 18–24 हफ्ते | फीटल इको | बच्चे के दिल की अलग, विस्तृत जाँच — जब कोई risk factor हो या स्कैन में शक हो |
| 24 हफ्ते के बाद | Growth स्कैन + डॉपलर | बच्चे की बढ़त, पानी की मात्रा, और placenta से बच्चे तक खून का बहाव |
ये हफ्ते आम pregnancy के लिए हैं। अगर पहले कोई दिक्कत रही है, या इस pregnancy में कुछ मिला है, तो स्कैन की संख्या और समय दोनों बदल सकते हैं।
अपने हफ्ते या अपने सवाल के हिसाब से guide चुनें।
Screening और diagnosis एक चीज़ नहीं हैं, और यह फ़र्क़ समझना बहुत काम आता है।
Screening test — जैसे NT स्कैन के साथ blood test, या NIPT — यह बताता है कि किसी स्थिति की संभावना कितनी है। «Low risk» का मतलब «बिल्कुल नहीं» नहीं होता, और «high risk» का मतलब «बच्चे को है» नहीं होता। यह सिर्फ एक संख्या है, जो बताती है कि आगे जाँच करनी चाहिए या नहीं।
Diagnostic test — जैसे amniocentesis या CVS — यह बच्चे का अपना नमूना लेकर जवाब देता है। इसका जवाब पक्का होता है, पर इसमें एक छोटा सा procedure-related risk भी होता है, जो counselling में साफ़ बताया जाता है।
कोई भी स्कैन या टेस्ट हर स्थिति नहीं पकड़ सकता। एक विस्तृत एनोमली स्कैन भी हर structural problem नहीं दिखा पाता — कुछ चीज़ें बाद में बनती हैं, कुछ बहुत छोटी होती हैं, और माँ का weight, बच्चे की position तथा पानी की मात्रा भी दिखाई पर असर डालती है। ईमानदार जवाब यही है, और यही हर guide में लिखा है।
रिपोर्ट के आख़िर में लिखा impression अकेला नहीं पढ़ा जाता। उसे हफ्तों, पिछली रिपोर्ट्स और आपकी medical history के साथ मिलाकर देखा जाता है।
ज़्यादातर findings isolated होने पर और combined होने पर पूरी तरह अलग मायने रखती हैं। अकेला शब्द खोजने पर डरावने नतीजे ऊपर आते हैं।
इस pregnancy की हर स्कैन रिपोर्ट, blood reports, screening results, और पिछली pregnancy के कागज़ भी। Dating किस स्कैन से तय हुई थी, यह बहुत काम की जानकारी होती है।
यह finding क्या है, इसका असर कितना है, और अगला कदम क्या है — कौन सा टेस्ट, कब, और उसके बाद क्या तय होगा।
कई परिवार सोचते हैं कि फीटल मेडिसिन स्पेशलिस्ट सिर्फ स्कैन करते हैं और आगे की care किसी और के पास होती है। यहाँ स्कैन, procedure, counselling और pregnancy का management — thyroid, diabetes, BP, Rh-negative, बार-बार होने वाला नुकसान — एक ही specialist के हाथ में हो सकता है, या आपके अपने obstetrician के साथ मिलकर चल सकता है।
यही जानकारी मराठी में भी उपलब्ध है, और English में Patient Education Hub पर, जहाँ हर trimester के स्कैन, fetal conditions और genetic testing की विस्तृत guides हैं। Video gallery में Dr. Kunda के समझाए हुए विषय देखे जा सकते हैं।
उन परिवारों के लिए जिन्हें अपनी pregnancy के स्कैन, screening और रिपोर्ट अपनी भाषा में समझनी हैं। हर guide एक विषय पर है और आसान हिंदी में लिखा गया है।
नहीं। यह सिर्फ समझ बढ़ाने के लिए है। एक ही finding का मतलब हफ्तों, पिछली रिपोर्ट्स और आपकी history के हिसाब से बदल जाता है, इसलिए आपकी अपनी रिपोर्ट के लिए consultation ज़रूरी है।
अपने pregnancy हफ्ते से शुरू करें। 11 से 14 हफ्ते में NT स्कैन वाली, 18 से 22 हफ्ते में एनोमली स्कैन वाली, और अगर diabetes, BP, twins या पहले कोई दिक्कत रही है तो हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली guide।
हाँ। स्कैन वे खुद करती हैं। इसका फ़ायदा यह है कि probe हाथ में रहते हुए ही सवाल पूछे जा सकते हैं, और finding दिखते ही आगे का रास्ता तय हो जाता है।
Normal रिपोर्ट एक अच्छी ख़बर है, पर यह हर स्थिति को बाहर नहीं करती। कुछ चीज़ें बाद में बनती हैं और कुछ स्कैन पर दिखती ही नहीं। इसीलिए pregnancy में तय समय पर follow-up स्कैन होते हैं।
हाँ, आप सीधे appointment ले सकते हैं। अगर आपके डॉक्टर ने भेजा है, तो रिपोर्ट उन्हें भी भेजी जाती है ताकि आपकी pregnancy की care एक ही दिशा में चलती रहे।
उन्हें मेडिसिन में 20+ साल और फीटल मेडिसिन में 14+ साल का अनुभव है। वे MBBS, MS (Obs & Gynae), FIFM और FMF (London) हैं, Central India की पहली फीटल मेडिसिन स्पेशलिस्ट हैं, और Mayflower Clinic तथा Indian Institute of Fetal Medicine की Founder & Director हैं।
जो भी medical जानकारी स्कैन से मिलती है, वह पूरी और साफ़ बताई जाती है — बढ़त, बनावट, दिल, खून का बहाव, पानी। कुछ जानकारी क़ानूनन नहीं बताई जा सकती, और वह किसी भी हालत में नहीं बताई जाती।
मैं हिंदी और मराठी में समझाना इसलिए पसंद करती हूँ क्योंकि मेडिकल रिपोर्ट समझ आना और अपनी असली स्थिति समझ आना—ये दो अलग बातें हैं। जब कोई महिला अपनी भाषा में सवाल पूछती है, तो वो अपने डर भी खुलकर बता पाती है। अच्छी काउंसलिंग वही है जहाँ घर जाकर भी आपको पता हो कि आपके डॉक्टर ने क्या और क्यों कहा।Dr. Kunda Shahane MBBS, MS (Obs & Gynae), FIFM, FMF (London)
Written and medically reviewed by Dr. Kunda Shahane, MBBS, MS (Obs & Gynae), FIFM, FMF (London) · Last reviewed: 13 September 2026
अपनी पिछली रिपोर्ट्स, prescription और screening results साथ लेकर धंतोली, नागपुर आइए। रेफरल ज़रूरी नहीं है — आप सीधे appointment ले सकते हैं।
Mayflower Clinic, Surdham Complex, Behind Silver Palace Building, 2nd Lane from Panchsheel Square, Opp. Yashwant Stadium, Dhantoli, Nagpur – 440012 · Monday–Saturday, 10:00 AM – 6:00 PM · Sunday closed
Mayflower Fetal Medicine & High-Risk Pregnancy Centre, Dhantoli, Nagpur, provides fetal ultrasound, prenatal diagnosis, fetal echocardiography, Doppler studies, genetic counseling and high-risk pregnancy care under Dr. Kunda Shahane.

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