
18 से 22 हफ्ते के बीच होने वाला यह स्कैन बच्चे की बनावट की विस्तृत जाँच है। यह पेज बताता है कि इसमें अंग-दर-अंग क्या देखा जाता है, यह क्या नहीं पकड़ सकता, और कुछ मिलने पर आगे क्या होता है।
एनोमली स्कैन को TIFFA या target scan भी कहा जाता है। यह प्रेग्नेंसी का वह स्कैन है जिसमें बच्चे के अंगों की बनावट पूरे विस्तार से देखी जाती है — दिमाग़ से लेकर पैर की उँगलियों तक। इसका मक़सद यह जानना है कि जो अंग अब तक बन चुके हैं, वे ठीक बने हैं या नहीं, ताकि ज़रूरत हो तो जन्म से पहले ही तैयारी की जा सके।
इस समय तक बच्चे के ज़्यादातर अंग बन चुके होते हैं और इतने बड़े हो चुके होते हैं कि साफ़ दिख सकें। साथ ही बच्चे के चारों तरफ़ पानी अच्छी मात्रा में होता है और हड्डियाँ अभी इतनी सख़्त नहीं होतीं कि परछाईं बनाकर पीछे का हिस्सा छिपा दें।
बहुत जल्दी करने पर कई हिस्से इतने छोटे होते हैं कि उनका ठीक मूल्यांकन नहीं हो पाता, और स्कैन दोबारा करना पड़ता है।
बहुत देर करने पर बच्चा बड़ा हो जाता है, जगह कम पड़ती है, हड्डियों की परछाईं बढ़ती है, और दिमाग़ तथा दिल के कुछ हिस्से देखना कठिन हो जाता है। कुछ मिलने पर आगे की जाँच और योजना के लिए बचा समय भी कम रह जाता है।
| हिस्सा | क्या देखा जाता है |
|---|---|
| सिर और दिमाग़ | खोपड़ी की बनावट, दिमाग़ के कक्ष, cerebellum, और दिमाग़ के पीछे का हिस्सा |
| चेहरा | होंठ और तालू, आँखों के बीच की दूरी, ठुड्डी की बनावट |
| रीढ़ | पूरी लंबाई में, कई कोणों से — ऊपर की त्वचा समेत |
| दिल | चारों कक्ष, दोनों बड़ी नसों का निकलना, दिल की धड़कन और लय |
| छाती | दोनों फेफड़े, डायफ्राम, और छाती में कोई गाँठ तो नहीं |
| पेट | पेट, आँतें, पेट की दीवार, और नाभि से नस का जुड़ाव |
| किडनी और मूत्राशय | दोनों किडनी, उनकी बनावट, और मूत्राशय भरा हुआ दिखना |
| हाथ-पैर | लंबी हड्डियाँ, हाथ-पैर की स्थिति, और उँगलियाँ |
| Placenta और पानी | Placenta की जगह, पानी की मात्रा, और नाभि की नस |
| बढ़त | सिर, पेट और जाँघ की हड्डी की नाप, उम्र के हिसाब से |
| गर्भाशय का मुँह | लंबाई — समय से पहले डिलीवरी के ख़तरे का अंदाज़ा |
यह हिस्सा उतना ही ज़रूरी है जितना ऊपर वाला, और अक्सर किसी को बताया नहीं जाता।
एनोमली स्कैन बनावट देखता है — काम नहीं। यानी यह देख सकता है कि किडनी बनी है या नहीं, पर यह नहीं बता सकता कि वह जन्म के बाद कितनी अच्छी तरह काम करेगी। यह दिमाग़ की बनावट देख सकता है, पर बच्चे की बुद्धि या आगे का विकास नहीं बता सकता।
कुछ स्थितियाँ इस उम्र में बनी ही नहीं होतीं और बाद में सामने आती हैं — जैसे दिल की कुछ दिक्कतें, आँतों की रुकावट, या दिमाग़ के कुछ बदलाव। कुछ इतनी छोटी होती हैं कि सोनोग्राफी की पहुँच से बाहर रहती हैं।
और यह स्कैन chromosomal स्थितियों की जाँच नहीं है। कुछ इशारे ज़रूर मिल सकते हैं, पर उनका पक्का जवाब सिर्फ genetic जाँच से आता है।
दिखाई कितनी अच्छी होगी, यह इन बातों पर निर्भर करता है: बच्चे की position — अगर वह पीठ ऊपर करके लेटा है तो चेहरा और रीढ़ देखना कठिन होता है; पानी की मात्रा; माँ का वज़न और पेट की मोटाई; पिछले ऑपरेशन के निशान; और प्रेग्नेंसी का हफ्ता। इनमें से कुछ भी किसी की ग़लती नहीं है, और इसीलिए कभी-कभी दोबारा बुलाया जाता है।
ज़्यादातर मामलों में जो मिलता है वह छोटा और अकेला होता है, और उसका कोई असर नहीं पड़ता। पर जहाँ कुछ महत्व की चीज़ मिलती है, वहाँ क्रम यह रहता है:
क्या दिखा, कितना पक्का है, और अकेला है या किसी और चीज़ के साथ। यह बातचीत स्कैन के तुरंत बाद होती है, रिपोर्ट लेकर घर जाने के बाद नहीं।
फीटल इको, neurosonography, या एम्नियोसेंटेसिस जैसी genetic जाँच — जो स्थिति माँगे।
कई स्थितियों में आगे के स्कैन यह बताते हैं कि चीज़ बढ़ रही है, वैसी ही है, या अपने आप ठीक हो रही है। बहुत सी चीज़ें तीसरी तिमाही तक अपने आप ठीक हो जाती हैं।
कुछ बच्चों को जन्म के तुरंत बाद विशेषज्ञ की ज़रूरत होती है। ऐसे में यह तय किया जाता है कि डिलीवरी कहाँ हो, ताकि NICU और ज़रूरी डॉक्टर पहले से मौजूद हों। Fetal conditions पेज पर हर स्थिति की अलग जानकारी है।
नहीं। एनोमली स्कैन की असली जाँच 2D में होती है — बनावट, नाप और अंगों की परतें उसी में दिखती हैं। 3D और 4D कुछ ख़ास हालात में मदद करते हैं, जैसे चेहरे या हड्डियों की किसी दिक्कत को बेहतर समझने में, और तब इस्तेमाल किए जाते हैं। पर «3D स्कैन करवाना है» की सोच से जाँच बेहतर नहीं होती। जो देखा जाना है वह 2D में देखा जाता है।
यहाँ स्कैन Dr. Kunda खुद करती हैं और रिपोर्ट भी वही समझाती हैं। जो स्क्रीन पर दिखा, उसका मतलब किसी और तक पहुँचते-पहुँचते बदलता नहीं। ज़रूरत पड़ने पर आगे की जाँच, counselling और प्रेग्नेंसी का management भी यहीं हो सकता है।
Complete Pregnancy Care · हिंदी में सारी guides · Anomaly scan (English)
18 से 22 हफ्ते के बीच। 19 से 21 हफ्ते का समय आमतौर पर ज़्यादा सुविधाजनक रहता है — अंग काफ़ी बन चुके होते हैं और देखने की जगह भी बची रहती है।
आमतौर पर 30 से 45 मिनट, और कई बार इससे ज़्यादा। यह एक लंबा और धीरज वाला स्कैन है। समय लेकर आइए।
यह बहुत आम बात है और इसमें कोई चिंता की बात नहीं। थोड़ा चलना, करवट बदलना या कुछ देर इंतज़ार करना काम कर जाता है। कभी-कभी बचा हुआ हिस्सा देखने के लिए दोबारा बुलाया जाता है — इसका मतलब यह नहीं कि कुछ ग़लत मिला है।
हाँ। बल्कि जहाँ कुछ समझाना होता है, वहाँ साथ में कोई होना अच्छा रहता है, क्योंकि एक बार में सारी बात याद रखना मुश्किल होता है।
इस प्रेग्नेंसी की पिछली सारी रिपोर्ट्स और फ़िल्में — ख़ास तौर पर वह स्कैन जिससे तारीख़ तय हुई थी — खून की जाँच, और चल रही दवाइयों के नाम। खाना-पीना सामान्य रखें।
आमतौर पर तीसरी तिमाही में बढ़त देखने के लिए एक स्कैन किया जाता है। Normal एनोमली स्कैन का मतलब है कि उस दिन तक बनावट में कुछ नहीं मिला — यह आगे के लिए क्लीन चिट नहीं है।
नहीं, यह उसकी जाँच नहीं है। कुछ नरम इशारे मिल सकते हैं, जो अकेले होने पर अक्सर सामान्य बच्चों में भी दिखते हैं। पक्का जवाब सिर्फ genetic जाँच से आता है।
नहीं। यह पेट के ऊपर से की जाने वाली सोनोग्राफी है। लंबे स्कैन में लेटे रहने से थकान हो सकती है, इसलिए बीच में करवट बदलने या उठ बैठने में कोई हर्ज नहीं।
रिपोर्ट और फ़िल्म लेकर आइए। कई बार रिपोर्ट देखकर काम चल जाता है। पर अगर कोई सवाल खड़ा हुआ है या तस्वीरें पूरी नहीं हैं, तो स्कैन दोहराया जाता है — यह असामान्य नहीं है।
एनोमली (Anomaly) स्कैन के वक़्त मैं पेरेंट्स को साफ बताती हूँ कि यह बहुत डिटेल जाँच है, पर कोई भी मशीन हर चीज़ की 100% गारंटी नहीं दे सकती। मेरा काम है जो दिख रहा है उसे बारीकी से जाँचना और जो लिमिटेशन्स हैं वो आपको ईमानदारी से बताना। अगर कुछ डाउट लगता है, तो सही टेस्ट और आगे का रास्ता दिखाना ही मेरा पहला काम है।Dr. Kunda Shahane MBBS, MS (Obs & Gynae), FIFM, FMF (London)
Written and medically reviewed by Dr. Kunda Shahane, MBBS, MS (Obs & Gynae), FIFM, FMF (London) · Last reviewed: 13 September 2026
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