
फीटल इको हर प्रेग्नेंसी में ज़रूरी नहीं होता। पर जहाँ कोई पक्का risk factor है, वहाँ «पिछला स्कैन नॉर्मल था» इसे टालने की वजह नहीं बनता। यह पेज बताता है कि किसे इसकी ज़रूरत है और किसे नहीं।
फीटल इको बच्चे के दिल की अलग और विस्तृत जाँच है। एनोमली स्कैन में भी दिल देखा जाता है, पर वह एक screening नज़र होती है — चार कक्ष, बड़ी नसों का निकलना, और धड़कन। फीटल इको उससे आगे जाता है: हर कक्ष, हर valve, नसों के जुड़ाव, लय, और खून का बहाव किस दिशा में और किस रफ़्तार से है। दोनों का मक़सद अलग है, और इसीलिए एक दूसरे की जगह नहीं ले सकता।
यह जाँच हर गर्भवती महिला के लिए नहीं है। इसकी सलाह तब दी जाती है जब कोई ऐसा कारण मौजूद हो जिससे दिल की बनावटी दिक्कत की संभावना आम से ज़्यादा हो।
| कारण | क्यों मायने रखता है |
|---|---|
| परिवार में दिल की जन्मजात बीमारी | माता-पिता या पहले बच्चे में ऐसी दिक्कत रही हो तो संभावना बढ़ जाती है |
| माँ को शुगर, ख़ास तौर पर प्रेग्नेंसी से पहले से | शुरुआती हफ्तों में शुगर का नियंत्रण दिल की बनावट पर असर डालता है |
| माँ को कोई autoimmune बीमारी | कुछ antibodies बच्चे के दिल की लय पर असर डाल सकती हैं |
| पिछले स्कैन में दिल को लेकर कोई शक | यही आम कारण है — एनोमली स्कैन में कोई view साफ़ न मिलना या असामान्य लगना |
| बढ़ी हुई NT | पहली तिमाही की बढ़ी हुई परत का दिल की दिक्कतों से जाना-पहचाना जुड़ाव है |
| IVF से हुई प्रेग्नेंसी | आँकड़ों में थोड़ी बढ़ी हुई संभावना देखी गई है |
| एक जैसे जुड़वाँ बच्चे | एक placenta साझा करने वाले जुड़वाँ में दिल पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है |
| कुछ दवाइयाँ, ख़ास तौर पर शुरुआती हफ्तों में ली गई | जो दवा ली गई है उसका नाम बताना ज़रूरी है, ताकि सही आकलन हो |
| बच्चे की धड़कन बहुत तेज़, बहुत धीमी या अनियमित | लय की जाँच फीटल इको का ही हिस्सा है |
अगर इनमें से कुछ भी नहीं है, तो आमतौर पर एनोमली स्कैन की cardiac जाँच पर्याप्त मानी जाती है।
यह वह जगह है जहाँ अक्सर गड़बड़ होती है, इसलिए इसे साफ़ लिखना ज़रूरी है।
एनोमली स्कैन में दिल की जो जाँच होती है वह screening है। उसका काम ज़्यादातर बड़ी दिक्कतों को पकड़ना है, हर दिक्कत को नहीं। दिल की कई बनावटी समस्याएँ ऐसी होती हैं जो चार-कक्ष वाले view में सामान्य दिखती हैं और तभी पकड़ में आती हैं जब बड़ी नसों के जुड़ाव और बहाव को अलग से देखा जाए।
इसलिए जब कोई पक्का risk factor मौजूद हो — परिवार में बीमारी, शुगर, बढ़ी हुई NT — तो «पिछला स्कैन तो ठीक था» सुनकर फीटल इको टाल देना एक ऐसी ग़लती है जिसकी क़ीमत जन्म के बाद चुकानी पड़ सकती है। Risk factor होने पर जाँच risk factor की वजह से होती है, पिछली रिपोर्ट की वजह से नहीं।
आम तौर पर 18 से 24 हफ्ते के बीच। इस समय दिल इतना बड़ा हो चुका होता है कि उसकी बनावट देखी जा सके, और पर्याप्त समय भी बचा रहता है।
जहाँ बहुत तगड़ा कारण हो — जैसे पहले बच्चे में दिल की गंभीर बीमारी — वहाँ 13 से 16 हफ्ते में एक शुरुआती जाँच की जा सकती है, पर उसे बाद में दोहराना पड़ता है, क्योंकि उस उम्र में हर चीज़ नहीं दिखती।
दोबारा जाँच तब की जाती है जब पहली बार कोई हिस्सा साफ़ न दिखा हो, कोई शक बना रहे, लय में गड़बड़ी मिली हो, या जुड़वाँ बच्चों में निगरानी चल रही हो।
चारों कक्ष, उनके बीच की दीवारें, और valves — सब अपनी जगह और अपने आकार में हैं या नहीं।
दोनों बड़ी नसें सही कक्ष से निकल रही हैं या नहीं, और आगे जाकर सही जगह जुड़ रही हैं या नहीं। कई गंभीर दिक्कतें यहीं पकड़ी जाती हैं।
धड़कन की रफ़्तार और नियमितता। बहुत तेज़, बहुत धीमी या अनियमित धड़कन की अपनी अलग जाँच और अपना अलग इलाज है।
रंगीन Doppler से यह देखा जाता है कि खून किस दिशा में और किस रफ़्तार से बह रहा है, और कहीं उल्टा तो नहीं जा रहा।
दिल की बनावटी दिक्कतें एक जैसी नहीं होतीं। कुछ इतनी छोटी होती हैं कि जन्म के बाद अपने आप बंद हो जाती हैं और कभी किसी इलाज की ज़रूरत नहीं पड़ती। कुछ को जन्म के बाद ऑपरेशन की ज़रूरत होती है, और आज उनके नतीजे पहले से कहीं बेहतर हैं। इसलिए पहला काम यह तय करना होता है कि दिक्कत किस तरह की है, अकेली है या किसी और चीज़ के साथ।
उसके बाद तीन चीज़ें होती हैं: बच्चों के हृदय रोग विशेषज्ञ से बात, ताकि जन्म के बाद का इलाज पहले से तय हो; ज़रूरत हो तो genetic जाँच, क्योंकि दिल की कुछ दिक्कतें दूसरी स्थितियों के साथ आती हैं; और डिलीवरी की योजना — ऐसे बच्चे का जन्म वहाँ होना चाहिए जहाँ ज़रूरी विशेषज्ञ और NICU पहले से मौजूद हों।
जन्म से पहले पता चल जाने का असली फ़ायदा यही है। बीमारी बदलती नहीं, पर तैयारी बदल जाती है, और तैयारी नतीजे पर असर डालती है।
फीटल इको Dr. Kunda खुद करती हैं और उसका मतलब भी वही समझाती हैं। जहाँ आगे की निगरानी या दूसरी जाँचें ज़रूरी हों, वे उसी प्रेग्नेंसी की care का हिस्सा बन जाती हैं।
Complete Pregnancy Care · हिंदी में सारी guides · Fetal echo (English)
आमतौर पर 18 से 24 हफ्ते के बीच। बहुत तगड़ा कारण होने पर 13 से 16 हफ्ते में एक शुरुआती जाँच की जा सकती है, पर उसे बाद में दोहराना पड़ता है।
हाँ। एनोमली स्कैन में दिल की एक screening जाँच होती है — चार कक्ष, बड़ी नसों का निकलना, धड़कन। फीटल इको सिर्फ दिल पर केंद्रित विस्तृत जाँच है, जिसमें valves, जुड़ाव, लय और बहाव अलग-अलग देखे जाते हैं।
अगर माता-पिता या पिछले बच्चे में जन्मजात दिल की बीमारी रही है, तो हाँ, इसकी सलाह दी जाती है। रिश्तेदारों में बड़ी उम्र में हुई दिल की बीमारी — जैसे हार्ट अटैक या BP — इस श्रेणी में नहीं आती। कौन सी बीमारी थी, यह बताना ज़रूरी है।
अगर कोई पक्का risk factor मौजूद है, तो हाँ। एनोमली स्कैन की cardiac जाँच screening है और दिल की कई दिक्कतें उसमें सामान्य दिख सकती हैं। जाँच risk factor की वजह से की जाती है, पिछली रिपोर्ट की वजह से नहीं।
आमतौर पर 30 से 45 मिनट। बच्चे की position ठीक न हो तो इंतज़ार करना पड़ सकता है, क्योंकि दिल को कुछ ख़ास कोणों से ही ठीक देखा जा सकता है।
हाँ। यह पेट के ऊपर से की जाने वाली सोनोग्राफी है, जैसी बाक़ी स्कैन होती हैं। इसमें कोई सुई, कोई दवा और कोई विकिरण नहीं होता।
पहले यह तय होता है कि दिक्कत किस तरह की है। कुछ छोटी दिक्कतें जन्म के बाद अपने आप ठीक हो जाती हैं। जहाँ इलाज चाहिए, वहाँ बच्चों के हृदय रोग विशेषज्ञ से पहले ही बात की जाती है और डिलीवरी ऐसी जगह तय की जाती है जहाँ ज़रूरी सुविधा मौजूद हो।
नहीं। यह जाँच बहुत विस्तृत है, पर कुछ दिक्कतें बहुत छोटी होती हैं और कुछ जन्म के बाद ही सामने आती हैं, क्योंकि जन्म के समय बच्चे के खून के बहाव का रास्ता बदल जाता है। इसीलिए ज़रूरत होने पर जन्म के बाद भी जाँच की सलाह दी जाती है।
हाँ, यह एक अलग जाँच है और इसकी फ़ीस अलग है। मौजूदा दरें scan cost पेज पर दी गई हैं।
फीटल इको (Fetal Echo) हर गर्भवती महिला के लिए ज़रूरी नहीं होता। मैं पहले देखती हूँ कि कोई रिस्क है या नहीं—जैसे परिवार में हार्ट की बीमारी, शुगर, या पिछले स्कैन में कोई डाउट। लेकिन अगर कोई पक्का रिस्क फैक्टर है, तो सिर्फ 'पिछला स्कैन नॉर्मल था' बोलकर इसे टालना बहुत बड़ी गलती हो सकती है। सही टाइम पर सही डिसीजन लेना ही सबसे ज़रूरी है।Dr. Kunda Shahane MBBS, MS (Obs & Gynae), FIFM, FMF (London)
Written and medically reviewed by Dr. Kunda Shahane, MBBS, MS (Obs & Gynae), FIFM, FMF (London) · Last reviewed: 13 September 2026
पिछली सारी स्कैन रिपोर्ट्स, शुगर की जाँच और चल रही दवाइयों के नाम साथ लेकर धंतोली, नागपुर आइए। रेफरल ज़रूरी नहीं है।
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