Call for Appointment : 0712 6692706
Call Support 07126692706
Hindi Patient Guide · Dhantoli, Nagpur

डॉपलर स्कैन का मतलब क्या होता है?

डॉपलर कोई अलग मशीन नहीं है। यह उसी सोनोग्राफी का हिस्सा है, जिसमें यह देखा जाता है कि बच्चे तक खून और ऑक्सीजन सही तरह पहुँच रहे हैं या नहीं। यह पेज बताता है कि रिपोर्ट में लिखे शब्दों का मतलब क्या है।

खून के बहाव की जाँचरिपोर्ट के शब्द आसान भाषा मेंस्कैन Dr. Kunda खुद करती हैंFMF (London) certified
24–40हफ्ते — आम समय
20–30मिनट
14+साल फीटल मेडिसिन में
DhantoliNagpur – 440012

डॉपलर कोई अलग तरह की मशीन या अलग तरह की सोनोग्राफी नहीं है। यह उसी स्कैन का एक हिस्सा है, जिसमें ध्वनि तरंगों की मदद से यह देखा जाता है कि खून किस रफ़्तार से और किस दिशा में बह रहा है। साधारण स्कैन यह बताता है कि बच्चा कितना बड़ा है और उसकी बनावट कैसी है। डॉपलर उससे आगे का सवाल पूछता है — उस बच्चे तक खून और ऑक्सीजन ठीक तरह पहुँच रहे हैं या नहीं, और placenta अपना काम कर पा रही है या नहीं।

कृपया ध्यान दें इस केंद्र पर होने वाली हर सोनोग्राफी सिर्फ medical diagnosis के लिए की जाती है, PCPNDT Act, 1994 के पूर्ण पालन के साथ।

एक नज़र में

क्या देखता है
बच्चे, गर्भनाल और placenta में खून के बहाव की रफ़्तार, दिशा और रुकावट
कब किया जाता है
ज़्यादातर तीसरी तिमाही में, अक्सर ग्रोथ स्कैन के साथ। ज़रूरत हो तो 24 हफ्ते से
किसे सलाह दी जाती है
ग्रोथ कम लगना, BP या preeclampsia, शुगर, जुड़वाँ, पिछली प्रेग्नेंसी की समस्या, हरकत कम लगना
कितना समय
क़रीब 20 से 30 मिनट। कोई सुई, दवा या विकिरण नहीं
तैयारी
कोई ख़ास नहीं। पुरानी सारी रिपोर्ट्स साथ लाइए — बदलाव की रफ़्तार उन्हीं से पढ़ी जाती है

डॉपलर असल में किन नसों को देखता है

डॉपलर एक जगह की जाँच नहीं है। अलग-अलग नसें अलग-अलग बात बताती हैं, और उन्हें साथ मिलाकर पढ़ा जाता है।

कौन सी नसवह क्या बताती है
Umbilical artery — गर्भनाल की नसplacenta की तरफ़ बहाव में कितनी रुकावट है। placenta की कार्यक्षमता का पहला संकेत यहीं मिलता है
Middle cerebral artery (MCA) — दिमाग की नसबच्चे के दिमाग को खून कैसे मिल रहा है। कम ऑक्सीजन की स्थिति में शरीर दिमाग की तरफ़ बहाव बढ़ा देता है
Cerebroplacental ratio (CPR)ऊपर की दोनों नसों का आपसी अनुपात। अकेली किसी एक नस से ज़्यादा भरोसेमंद माना जाता है
Uterine arteries — माँ की नसेंबच्चेदानी से placenta तक खून की आपूर्ति। BP की दिक्कत और ग्रोथ की समस्या की संभावना का शुरुआती संकेत
Ductus venosusबच्चे के दिल की तरफ़ लौटता बहाव। गंभीर ग्रोथ समस्या में यह तय करने में मदद करता है कि स्थिति कितनी आगे बढ़ी है
MCA peak systolic velocityबच्चे में खून की कमी का अंदाज़ा — ख़ास तौर पर Rh negative माँ या किसी infection के बाद

रिपोर्ट में लिखे शब्दों का मतलब

डॉपलर रिपोर्ट में कुछ शब्द बार-बार आते हैं। इनका मतलब समझ लेने से आधी घबराहट वैसे ही कम हो जाती है।

शब्दआसान भाषा में
PI — pulsatility indexबहाव में रुकावट का माप। संख्या जितनी ऊँची, रुकावट उतनी ज़्यादा। हर हफ्ते की अपनी सामान्य सीमा होती है, इसलिए नंबर हमेशा गर्भ की उम्र के साथ पढ़ा जाता है
RI — resistive indexयही बात नापने का दूसरा तरीक़ा। कई रिपोर्ट में PI और RI दोनों लिखे होते हैं
S/D ratioदिल की धड़कन के समय और दो धड़कनों के बीच के बहाव का अनुपात
Within normal limits / normal for gestational ageउस हफ्ते के लिए माप सामान्य सीमा में है
Raised / increased PIरुकावट बढ़ी हुई है। इसका मतलब तुरंत ख़तरा नहीं, बल्कि यह कि नज़र और क़रीब से रखनी है
Absent end-diastolic flow (AEDF)दो धड़कनों के बीच बहाव रुक जाना। यह गंभीर संकेत है और इसके बाद निगरानी बहुत नज़दीकी हो जाती है
Reversed end-diastolic flow (REDF)बहाव का उल्टी दिशा में जाना। यह और भी गंभीर है और इसमें भर्ती करके निगरानी की ज़रूरत पड़ सकती है
Brain sparing / cerebral redistributionबच्चा दिमाग की तरफ़ ज़्यादा खून भेज रहा है। यह शरीर का बचाव तरीक़ा है, और यह बताता है कि बच्चे पर दबाव पड़ रहा है
Notching — uterine artery मेंमाँ की नसों के बहाव की लहर में एक ख़ास मोड़। दूसरी तिमाही के बाद भी मौजूद रहे तो BP और ग्रोथ पर नज़र रखी जाती है

एक बात याद रखिए: डॉपलर की कोई भी संख्या अकेले में «अच्छी» या «ख़राब» नहीं होती। वह हमेशा गर्भ की उम्र, बच्चे की ग्रोथ, पानी की मात्रा और माँ की स्थिति के साथ पढ़ी जाती है।

एक नंबर नहीं, पूरा pattern

डॉपलर रिपोर्ट देखकर अक्सर यही ग़लती होती है कि एक संख्या पर ध्यान अटक जाता है। किसी एक नस का PI थोड़ा ऊपर होना अपने आप में कोई नतीजा नहीं है।

असल जानकारी तीन चीज़ों को साथ रखकर मिलती है। पहला, अलग-अलग नसों का आपसी रिश्ता — गर्भनाल की रुकावट बढ़ी है या नहीं, और दिमाग की तरफ़ बहाव बदला है या नहीं। दूसरा, बदलाव की रफ़्तार — पिछली बार क्या था और दो हफ्ते में कितना बदला। तीसरा, बाक़ी तस्वीर — बच्चे की ग्रोथ का ग्राफ़, पानी की मात्रा, बच्चे की हरकत और माँ का BP।

इसीलिए पुरानी रिपोर्ट साथ लाना मायने रखता है। एक अकेली डॉपलर रिपोर्ट एक तस्वीर है; दो रिपोर्ट मिलकर दिशा बताती हैं, और दिशा ही निगरानी का असली आधार है।

किन हालात में डॉपलर की सलाह दी जाती है

डॉपलर हर प्रेग्नेंसी में हर स्कैन के साथ ज़रूरी नहीं होता। इसकी सलाह तब दी जाती है जब कोई ऐसी वजह हो जिससे placenta के काम पर या बच्चे की ग्रोथ पर असर पड़ सकता हो।

स्थितिडॉपलर की भूमिका
बच्चे की ग्रोथ कम लगनायह तय करने में मदद करता है कि बच्चा संविधान से छोटा है या placenta की वजह से दबाव में है
माँ को BP की दिक्कत या preeclampsiaplacenta की आपूर्ति पर नज़र रखने का मुख्य ज़रिया
शुगरग्रोथ और बहाव, दोनों पर असर पड़ सकता है
जुड़वाँ बच्चे, ख़ास तौर पर एक placenta साझा करने वालेदोनों बच्चों के बीच बहाव का संतुलन देखने के लिए, तय अंतराल पर
पिछली प्रेग्नेंसी में ग्रोथ की समस्या या समय से पहले डिलीवरीइस बार शुरू से नज़दीकी निगरानी का आधार बनता है
बच्चे की हरकत कम महसूस होनाबाक़ी जाँचों के साथ मिलाकर स्थिति समझने के लिए
Rh negative माँ में antibodies मिलनाMCA peak systolic velocity से बच्चे में खून की कमी का अंदाज़ा लगाया जाता है
नियत तारीख़ निकल जानाplacenta की कार्यक्षमता पर नज़र रखने के लिए

कब और कितनी बार

बच्चे की ओर की नसों का डॉपलर आमतौर पर तीसरी तिमाही में किया जाता है, अक्सर ग्रोथ स्कैन के साथ ही, यानी क़रीब 28 हफ्ते के बाद। जहाँ ग्रोथ की चिंता पहले से हो, वहाँ यह 24 हफ्ते के आसपास भी शुरू हो सकता है।

माँ की uterine artery का डॉपलर इससे अलग है। वह पहली तिमाही के स्कैन के समय या 20 से 22 हफ्ते के आसपास किया जाता है, और उसका मक़सद आगे BP या ग्रोथ की दिक्कत की संभावना का अंदाज़ा लगाना होता है, ताकि निगरानी पहले से तय की जा सके।

कितनी बार दोहराना है, इसका कोई एक जवाब नहीं है। कहीं दो-तीन हफ्ते में एक बार काफ़ी होता है, कहीं हर हफ्ते, और कहीं स्थिति गंभीर हो तो रोज़ भी। यह फ़ैसला पिछली रिपोर्ट और मौजूदा स्थिति देखकर लिया जाता है, किसी तय schedule से नहीं।

डॉपलर क्या नहीं बता सकता

यह बात साफ़ लिखी जानी चाहिए, क्योंकि उम्मीद ग़लत जगह बँध जाए तो नुक़सान होता है।

डॉपलर बच्चे की बनावट की जाँच नहीं है — अंगों की जाँच एनोमली स्कैन का काम है। यह किसी genetic स्थिति के बारे में नहीं बताता। यह इस बात का वादा भी नहीं कर सकता कि आगे सब ठीक ही रहेगा: यह उस दिन की स्थिति की तस्वीर है, और स्थिति कुछ दिनों में बदल सकती है। इसीलिए सामान्य डॉपलर के बाद भी दोबारा जाँच की सलाह दी जाती है, और इसीलिए बच्चे की हरकत कम लगने पर «पिछली रिपोर्ट तो ठीक थी» सोचकर इंतज़ार नहीं करना चाहिए।

दूसरी तरफ़, हर बढ़ा हुआ नंबर बुरी ख़बर भी नहीं होता। कई बार थोड़ी बढ़ी हुई रुकावट वाली प्रेग्नेंसी सिर्फ़ नज़दीकी निगरानी के साथ पूरे समय तक अच्छी तरह चलती है। जाँच का मक़सद डराना नहीं, समय रहते सही क़दम तय करना है।

अगर डॉपलर सामान्य न आए तो

पहले पूरी तस्वीर

ग्रोथ का ग्राफ़, पानी की मात्रा, बच्चे की हरकत, माँ का BP और पेशाब की जाँच — सब एक साथ देखे जाते हैं। अकेली डॉपलर रिपोर्ट पर फ़ैसला नहीं होता।

निगरानी की नई तारीख़

जाँच का अंतराल छोटा कर दिया जाता है। कितना छोटा, यह इस पर निर्भर करता है कि बहाव में बदलाव किस स्तर का है।

माँ की स्थिति संभालना

BP, शुगर, thyroid या खून की कमी — जो भी वजह हो, उसका इलाज साथ-साथ चलता है, क्योंकि उससे बहाव पर सीधा असर पड़ता है।

डिलीवरी की योजना

ज़रूरत पड़ने पर फेफड़ों की तैयारी के इंजेक्शन, और डिलीवरी का सही समय और सही जगह तय करना — ऐसी जगह जहाँ NICU मौजूद हो। यह फ़ैसला परिवार को समझाकर लिया जाता है।

Dr. Kunda की बात, वीडियो में

स्कैन, रिपोर्ट का मतलब और आगे की निगरानी — एक ही जगह

डॉपलर Dr. Kunda खुद करती हैं और रिपोर्ट का मतलब भी वही समझाती हैं। जहाँ नज़दीकी निगरानी, दवाइयों में बदलाव या डिलीवरी की योजना ज़रूरी हो, वह उसी प्रेग्नेंसी की care का हिस्सा होती है — रिपोर्ट पकड़ाकर किसी और के पास भेजने का सिलसिला नहीं।

Complete Pregnancy Care · हिंदी में सारी guides · Colour Doppler scan (English) · Growth & wellbeing scan (English)

फ़ीस

डॉपलर आमतौर पर ग्रोथ स्कैन के हिस्से के रूप में किया जाता है। मौजूदा फ़ीस, और कौन सी जाँच में क्या शामिल है, एक ही पेज पर दिया गया है।

Pregnancy scan cost देखें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

डॉपलर स्कैन क्या होता है?

यह उसी सोनोग्राफी का एक हिस्सा है जिसमें खून के बहाव की रफ़्तार और दिशा देखी जाती है। इससे यह पता चलता है कि placenta अपना काम कर पा रही है या नहीं और बच्चे तक खून और ऑक्सीजन ठीक तरह पहुँच रहे हैं या नहीं।

क्या डॉपलर हर प्रेग्नेंसी में ज़रूरी है?

नहीं। इसकी सलाह तब दी जाती है जब कोई वजह मौजूद हो — जैसे ग्रोथ कम लगना, BP की दिक्कत, शुगर, जुड़वाँ बच्चे, पिछली प्रेग्नेंसी में कोई समस्या, बच्चे की हरकत कम महसूस होना, या नियत तारीख़ निकल जाना।

PI, RI और S/D ratio का मतलब क्या है?

तीनों एक ही बात नापने के अलग-अलग तरीक़े हैं — नस में बहाव की रुकावट कितनी है। संख्या जितनी ऊँची, रुकावट उतनी ज़्यादा। हर हफ्ते की अपनी सामान्य सीमा होती है, इसलिए यह नंबर हमेशा गर्भ की उम्र के साथ पढ़ा जाता है।

रिपोर्ट में «absent end-diastolic flow» लिखा है, इसका क्या मतलब है?

इसका मतलब है कि दो धड़कनों के बीच गर्भनाल की नस में बहाव रुक जाता है। यह गंभीर संकेत है और इसके बाद निगरानी बहुत नज़दीकी हो जाती है — अक्सर हर कुछ दिन में जाँच, और कभी भर्ती करके। यह अपने आप में कोई अंतिम नतीजा नहीं है, पर इसे टालना नहीं चाहिए।

क्या सामान्य डॉपलर का मतलब है कि आगे सब ठीक रहेगा?

नहीं। यह उस दिन की स्थिति की तस्वीर है और स्थिति कुछ दिनों में बदल सकती है। इसीलिए ज़रूरत के हिसाब से जाँच दोहराई जाती है, और बच्चे की हरकत कम लगने पर पिछली रिपोर्ट के भरोसे इंतज़ार नहीं करना चाहिए।

क्या डॉपलर बच्चे के लिए सुरक्षित है?

हाँ, जब यह चिकित्सकीय कारण से और ज़रूरी सेटिंग्स पर किया जाए। इसमें कोई सुई, दवा या विकिरण नहीं होता। जाँच के दौरान thermal index कम रखा जाता है और जितनी देर ज़रूरी हो उतनी ही देर की जाती है।

कितनी बार करवाना पड़ता है?

यह स्थिति पर निर्भर करता है। कहीं दो-तीन हफ्ते में एक बार काफ़ी होता है, कहीं हर हफ्ते, और गंभीर स्थिति में इससे भी ज़्यादा बार। अंतराल पिछली रिपोर्ट और मौजूदा स्थिति देखकर तय किया जाता है।

जाँच के लिए क्या तैयारी चाहिए?

कोई ख़ास तैयारी नहीं। खाली पेट आने की ज़रूरत नहीं है और तीसरी तिमाही में भरा हुआ पेट भी ज़रूरी नहीं होता। पुरानी सारी स्कैन रिपोर्ट, BP और शुगर की जाँचें और चल रही दवाइयों के नाम साथ लाइए — पिछली रिपोर्ट के बिना बदलाव की रफ़्तार नहीं पढ़ी जा सकती।

इसमें कितना समय लगता है?

आमतौर पर 20 से 30 मिनट। बच्चा हिल-डुल रहा हो या साँस जैसी हरकत कर रहा हो तो सही माप के लिए रुककर इंतज़ार करना पड़ता है, इसलिए कभी-कभी ज़्यादा समय लग सकता है।

क्या इसकी फ़ीस अलग होती है?

डॉपलर आमतौर पर ग्रोथ और wellbeing स्कैन के हिस्से के रूप में किया जाता है और उसी की फ़ीस लगती है। मौजूदा दरें scan cost पेज पर दी गई हैं। consultation की फ़ीस स्कैन की फ़ीस के अतिरिक्त लगती है।

In Dr. Kunda’s words
डॉपलर (Doppler) स्कैन समझाते वक़्त मैं हमेशा कहती हूँ, 'मैं सिर्फ बच्चे का साइज़ नहीं देख रही, बल्कि ये भी चेक कर रही हूँ कि उसे खून और ऑक्सीजन सही से मिल रहा है या नहीं।' प्लेसेंटा और बच्चे के दिमाग का ब्लड फ्लो हमें बहुत कुछ बताता है। मेरे लिए रिपोर्ट का कोई एक नंबर नहीं, बल्कि पूरे स्कैन का पैटर्न सबसे ज़्यादा मायने रखता है।
Dr. Kunda Shahane MBBS, MS (Obs & Gynae), FIFM, FMF (London)

Written and medically reviewed by Dr. Kunda Shahane, MBBS, MS (Obs & Gynae), FIFM, FMF (London) · Last reviewed: 15 September 2026

Related pages

डॉपलर रिपोर्ट समझ नहीं आ रही?

पुरानी सारी स्कैन रिपोर्ट्स, BP और शुगर की जाँचें और चल रही दवाइयों के नाम साथ लेकर धंतोली, नागपुर आइए। रेफरल ज़रूरी नहीं है।

Mayflower Clinic, Surdham Complex, Behind Silver Palace Building, 2nd Lane from Panchsheel Square, Opp. Yashwant Stadium, Dhantoli, Nagpur – 440012 · Monday–Saturday, 10:00 AM – 6:00 PM · Sunday closed

PCPNDT Act Compliance Notice Mayflower Fetal Medicine & High-Risk Pregnancy Centre strictly complies with the Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques (Prohibition of Sex Selection) Act, 1994. Sex determination and sex-selective practices are prohibited and punishable by law. Our ultrasound services are used exclusively for medical diagnosis. Disclosure of fetal sex is illegal and is not performed at this centre under any circumstances.
Medical Disclaimer यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है और इससे व्यक्तिगत मेडिकल सलाह की जगह नहीं ली जा सकती। डॉपलर रिपोर्ट का मतलब आपकी अपनी स्थिति, गर्भ की उम्र और पिछली रिपोर्ट्स देखकर ही तय होता है। अपनी रिपोर्ट के लिए Dr. Kunda Shahane या अपने treating obstetrician से सलाह लें।